गुरूवार १६ जनवरी २०१४ को परम पूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापुजीने प्रवचन में एक बहुतही महत्वपुर्ण Algoritham के बारेमें बताया। आदिमाता चण्डिका अपने पुत्र के साथ यानी परमात्मा के साथ हर पल केवल भावरुप में नहीं बल्कि प्रत्यक्ष रूप में हमारे जीवन में रहती है यह बात इससे स्पष्ट हुई। हम सब को चण्डिकामाता और परमात्मा के हात जो व्यक्तित्व (Individuality) दिया गया है, जो हम में रहनेवाला bestest गुण है, वह गुण हमारे जीवन में इस मार्गदर्शन से कार्य करना शुरु करेगा।
प्रवचन पूरा हो जाने के बाद बापु ने सभी श्रध्दावानों को एक दुर्लभ उपहार दिया। बापु ने स्वयं ‘जय जगदंब, जय जगदंब, जय जगदंब, जय दुर्गे’ यह गजर किया। इस गजर में सभी श्रध्दावान अपना देहभान खोकर तल्लीन हो गये थे। इस गजर में सम्मिलित होना हम सब को यकीनन ही अच्छा लगेगा। तो चलिए, ह्म भी इस गजर में शामिल होते हैं।
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